ऊँ नमो भगवते गोरक्षनाथाय | धर्मो रक्षति रक्षितः | श्री गोरक्षनाथो विजयतेतराम | यतो धर्मस्ततो जयः |     Helpline 24/7: 0551-2255453, 54

गोरखनाथजी की रचनाएँ:

योगाचार्य श्री गोरक्षनाथजी ने संस्कृत और लोकभाषा दोनों में योगपरक-साहित्य का सृजन किया है :-

  • गोरक्ष कल्प
  • गोरक्ष-संहिता
  • गोरक्ष-शतक
  • गोरक्ष-गीता
  • विवेकमार्तण्ड
  • गोरक्षशास्त्र
  • ज्ञानप्रकाश-शतक
  • ज्ञानामृतयोग
  • महार्थमंजरी
  • योगचिन्तामणि
  • योगमार्तण्ड
  • योगसिद्धान्त-पद्धति
  • अमनस्कयोग
  • श्रीनाथसूत्र सिद्धसिद्धान्तपद्धति
  • हठयोग-संहिता
  • प्राणसंकली
  • डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल द्वारा सम्पादित गोरखबानी

संग्रहीत रचनाएँ उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं जिनसे उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की महनीयता का पता चलता है।