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मंदिर के कार्यक्षेत्र : शिक्षा

श्रीगोरक्षनाथ संस्कृत-विद्यापीठ

श्री गोरखनाथ-मन्दिर के प्रांगण में गोरक्षनाथ संस्कृत-विद्यापीठ है। भारतीय संस्कृति की मातृ-भाषा संस्कृत के प्रति मन्दिर की निष्ठा का स्मारक यह एक ‘क’ वर्गीय महाविद्यालय है, जिसमें विद्यार्थियों के लिये निःशुल्क आवास, भोजन एवं अध्ययन की उत्तम और उल्लेखनीय आदर्श व्यवस्था है।

श्रीगोरखनाथ मन्दिर से सम्बन्धित अन्य स्थान

श्री गोरखनाथ मंदिर के ही तत्वावधान तथा संरक्षकत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की गयी है जिसके अन्तर्गत बालकों का छात्रावास प्रताप आश्रम, महाराणा प्रताप मीराबाई महिला छात्रावास, महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महाराणा प्रताश शिशु शिक्षा विहार आदि लगभग चार दर्जन से भी अधिक शिक्षण, प्रशिक्षण तथा प्राविधिक संस्थाएँ गोरखपुर नगर, जनपद तथा महराजगंज जनपद तक विस्तृत हैं। भरोहिया का प्रसिद्ध शिव मन्दिर भी गोरखनाथ मन्दिर के ही प्रबन्ध में है। गोरखपुर महानगर में गोरखनाथ मन्दिर के प्रबन्ध में ही बेतियाहाता में मंगला देवी के प्राचीन मन्दिर का जीर्णोद्धार कर उसे भव्य स्वरूप प्रदान किया जा चुका है और उस परिसर का भी विकास एवं सुन्दरीकरण किया गया है। मंगला देवी मंदिर परिसर में स्थित विशालकाय भवन में एम.सी.ए. तथा बी.सी.ए. की कक्षाएँ भी चल रही हैं।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की उपलब्धियों में जुलाई 2005 से एक नया अध्याय और जुड़ गया। महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के गोरखपुर विश्वविद्यालय में विलीनीकरण के उपरान्त इस नाम से एक नया महाविद्यालय जंगल धूसड़ में स्थापित किया गया है जो शिक्षा एवं संस्कार के नए आयाम स्थापित करने को सतत सक्रिय है।