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मंदिर के धार्मिक कार्यक्षेत्र

अखण्ड अन्नक्षेत्र - भण्डारा

अखण्ड अन्नक्षेत्र या भण्डारा गुरु श्री गोरक्षनाथ मन्दिर की प्राचीन परम्परा है। कोई भी भक्त इस भण्डारे में सम्मिलित होकर श्रीनाथ जी का प्रसाद पा सकता है। इस भण्डारे का संचालन मध्याह्न तथा सांयकाल में होता है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त, दर्शनार्थी और असहाय व्यक्ति बिना किसी भेद-भाव के भण्डारे में आकर भोजन पाते हैं। ऐसा विश्वास है कि भण्डारे का प्रसाद पाने से रोगों और व्याधियों से मुक्ति मिलती है तथा मनुष्य दीर्घायु होता है।


जल-यन्त्र, कथा-मण्डपम् एवं यज्ञशाला

मन्दिर के ठीक सामने फूलों की क्यारियों से सुरम्य शाद्वल (घास के मैदान) के बीच जल-यन्त्र है जिससे निकलते जल के फव्वारे सूर्यास्त के बाद रंग-बिरंगे से संवलित होने पर इन्द्रधनुष की छटा बिखेरते हैं। श्री हनुमानजी के मन्दिर के सामने थोड़ी दूरी पर कथा-मण्डपम् तथा उसके उत्तर पार्श्व में निर्मित यज्ञशाला अपने स्वरूप से ही योग ज्ञान की भूमि में प्रतिष्ठित भक्ति और कर्म की त्रिवेणी का दृश्य उपस्थित करते हैं, जिसमें रुचि और अधिकार भेद से स्नान कर सभी अपना जीवन सफल बना सकते हैं।


गोशाला

गुरु श्री गोरक्षनाथ मंदिर गोवंश के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए समर्पित और प्रसिद्ध है। मन्दिर के पृष्ठभाग में एक सुव्यवस्थित गोशाला है, जिसमें पर्याप्त संख्या में विभिन्न नस्लों की गौएँ पाली जाती हैं। गोशाला में देशी गोवंश की कई दुर्लभ प्रजातियों के साथ ही हरियाणवी, साहीवाल, गंगा तीरी, गिरी एवं रेड सिन्धी नस्ल की गौ भी हैं। गौ पालन का मुख्य उद्देश्य मात्र गो सेवा ही है। इनसे प्राप्त होने वाले दूध का उपयोग प्रसाद बनाने तथा मंदिर के दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किया जाता है। गोवंश की सुरक्षा का सम्पूर्ण आधुनिक तंत्र कार्य करता है। गौ के साथ में प्रशिक्षित चरवाहे तथा प्रशिक्षित चिकित्सकों का दल उपलब्ध रहता है। स्वंय गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज अपने दैनिक दिनचर्या के रूप में प्रातः काल गोशाला में जाकर गो माता का दर्शन करते हैं तथा गो स्पर्श द्वारा गोवंश से आध्यात्मिक एवं भावनात्मक सम्बंद्ध स्थापित करते हैं।

अतिथि - निवास

सुदूर क्षेत्र से गुरु श्री गोरक्षनाथ मंदिर में आने वाले धर्माचार्यों, विशिष्ट व्यक्तियों एवं श्रद्धालुओं के निवास की अत्याधुनिक समुचित व्यवस्था है। धर्माचार्य एवं विशिष्ट अतिथि सन्त निवास एवं साधना भवन में बिना किसी भेद-भाव के तीन दिनों तक निःशुल्क ठहर सकते हैं। समुचित परिचय देने एवं व्यवस्था प्रबन्ध तंत्र से जुड़े व्यक्तियों की संतुष्टि के पश्चात ही यह सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। निवास के दौरान अतिथियों को मंदिर के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। श्रद्धालुओं के निवास के लिए धर्मशाला एवं यात्री निवास में तीन दिनों तक सशुल्क ठहरने की व्यवस्था है। यह सुविधा प्रबन्ध तंत्र से जुड़े लोगों द्वारा व्यक्ति के समुचित सत्यापन के पश्चात ही उपलब्ध करायी जाती है।

योग वाणी प्रकाशन

अध्यात्म और दर्शन जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से वर्ष 1980 में महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के द्वारा गुरु श्री गोरक्षनाथ मंदिर से योग वाणी का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया। इस मासिक पत्रिका का प्रकाशन निरन्तर होता है तथा इसके पाठक देश के सभी राज्यों सहित अनेक देशों में हैं। समय - समय पर राष्ट्रीय तथा अर्न्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक भी प्रयास करते हैं कि उनका लेख इस पत्रिका में छप सके।