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मन्दिर-परिसर के दर्शनीय स्थल:-

अखण्ड ज्योति

गोरखनाथ-मन्दिर के भीतर गोरक्षनाथजी द्वारा जलायी गयी अखण्ड ज्योति त्रेतायुग से आज तक अनवरत अनेक झंझावातों एवं प्रलयकारी आपत्तियों के थपेड़े खाकर भी अखण्ड रूप से जलती आ रही है। बहुत सी माताएँ इस ज्योति का काजल ले जाकर अपने बच्चों को लगाती हैं। यह ज्योति आध्यात्मिक ज्ञान, अखण्डता तथा एकान्तता की प्रतीक है।



अखण्ड धूना

अखण्ड धूना गोरखनाथ-मन्दिर, गोरखपुर के प्रांगण में विशेष आकर्षण का विषय है। इस धूने में त्रेतायुग में योगेश्वर गोरक्षनाथजी द्वारा प्रज्वलित अग्नि आज भी विद्यमान है तथा इसे अहर्निश प्रज्वलित रखने के लिए बराबर ईंधन डाला जाता रहता है। इस धूने की भस्म श्रद्धालुओं के लिए तरह-तरह के कष्टों को हरने वाली तथा परम पवित्र है।



देवमूर्तियाँ

गोरखनाथ-मन्दिर के अन्तर्वर्ती पार्श्व भाग (परिक्रमा मार्ग) में कुछ देव मूर्तियाँ प्रतिष्ठित हैं। सबसे पहले योग योगेश्वर भगवान शिव की भव्य मांगलिक मूर्ति प्रतिष्ठित है। महायोगी गुरु गोरक्षनाथजी इन्हीं सदाशिव के अवतार माने जाते हैं। इसके बाद विघ्नविनाशक श्रीगणेशजी का विग्रह है जिसकी दायीं-बायीं ओर ऋद्धि-सिद्धि खड़ी होकर चँवर डुला रहीं हैं। गणेशजी को गजकन्थडिनाथजी भी कहा जाता है। इसके बाद नवनाथों में कुछ की भित्ति मूर्तियाँ हैं।
मन्दिर के पश्चिमोत्तर कोण में काली माता की मूर्ति भक्तों के लिए बहुत आकर्षण का केन्द्र है। शिव के वक्ष पर नृत्य करती कराली काली का यह विग्रह दर्शनीय है। मुख्य मंदिर में ही उत्तर दिशा में कालभैरवजी की मूर्ति स्थापित है। इन्हें भगवान शंकर का कोतवाल और द्वार रक्षक कहा जाता है। मंदिर के उत्तर की ओर पार्श्व में माता शीतला देवी का भी मन्दिर है। शीतला माता नवदुर्गा का ही एक स्वरूप है।
माता शीतलादेवी के मन्दिर के समीप ही भैरवजी का स्थान त्रिशूलों से भरा है यहाँ मनौती के अनुसार त्रिशूल चढ़ाने की परम्परा है। भैरवजी के स्थान से मिला हुआ भगवान शिव का मन्दिर है। इसमें अत्यन्त दिव्य शिवलिंग है। इस शिवमूर्ति की भव्यता और असाधारण महिमा दर्शनीय है।
श्री गोरखनाथ मन्दिर के उत्तरवर्ती भाग में राधा कृष्ण मन्दिर, हट्ठी माता मन्दिर, संतोषी माता मन्दिर स्थित है। इसके समीप ही श्री राम दरबार, श्री नवग्रह देवता, श्री शनि देवता, भगवती बाल देवी जी तथा श्री भगवान विष्णु की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित हैं जो भक्तों के हृदय में आस्था एवं श्रद्धा का भाव संचरित करती हैं।

श्री दुर्गा मन्दिर

शिव मन्दिर के पार्श्व में सिंहवाहिनी माता का भव्य मन्दिर है, जहाँ श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है।

श्री हनुमानजी का मंदिर

श्री गोरखनाथ-मन्दिर के उत्तर तरफ सन्निकट ही हनुमानजी का मंदिर स्थित है। इस मन्दिर में श्रीहनुमानजी की विशाल, भव्य, संगमरमर निर्मित मूर्ति प्रतिष्ठित है। नाथ - पंथ में श्रीहनुमानजी की गणना अत्यंत सिद्ध महायोगी वीवङ्कनाथ या ध्वजनाथ के रूप में की जाती है।